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Wednesday, 10 August 2016

Baba saheb ANAMOL VICHAR

मैं  ऐसे  धर्म  को  मानता  हूँ  जो  स्वतंत्रता , समानता , और  भाई -चारा  सीखाये .
-B. R. Ambedkar 

 हिंदू धर्म में, विवेक, कारण, और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है.
-B. R. Ambedkar

मैं  किसी  समुदाय  की  प्रगति  महिलाओं  ने  जो  प्रगति  हांसिल  की  है  उससे  मापता  हूँ .
-B. R. Ambedkar 

जीवन  लम्बा  होने  की  बजाये  महान  होना  चाहिए .
-B. R. Ambedkar

Friday, 8 April 2016

मोहब्बत भी "भीम" से,      ईनायत भी "भीम" से,

मोहब्बत भी "भीम" से,
     ईनायत भी "भीम" से,
काम भी "भीम" से,
     नाम भी "भीम" से,
ख्याल भी "भीम" से,
     अरमान भी "भीम" से,
ख्वाब भी "भीम" से,
     माहोल भी "भीम" से,
यादें भी "भीम" से,
     मुलाकात भी "भीम" से,
सपने भी "भीम" से,
     अपने भी "भीम" से,
यारो यु कहो की
     अपनी तो सांसे भी "भीम" से.
नमो बुद्धस्स जय भीम साथियों।

..दिल से ...जय भीम..

Thursday, 7 April 2016

तू था पशु उस भीम ने इंसान बना दिया!

तू था पशु उस भीम ने इंसान बना दिया!

देकर धम्म की दीक्षा तुझे दयावान
बना दिया!

शिक्षा के खोलकर द्वार तुझे विद्वान
बना दिया!

तू था दरिद्र उस भीम ने महान बना दिया !

तेरी सुरक्षा के लिए सन्विधान बना दिया !

तेरे स्वाभिमान का हर सामान बना दिया !

फिर तुमने उस युग पुरुष का अहसान भुला दिया!!

दिल से जय भीम ॥

Wednesday, 6 April 2016

बाबा साहब के आज के नुमाईंदे

बाबा साहब के आज के नुमाईंदे :

बाबा साहब के लोगों के बीच घूमते हुए कुछ अनुभव हुआ ।

कभी सोचता हूँ कि अगर बाबा साहब नहीं होते तो क्या होता आज ?

ये सोचने मात्र से ही चक्कर आने लगता है।

क्या हम ठंढा गर्म वाली कार में घूम पाते ?

क्या अपने घर में AC लगा कर 51 इंच का टेलीविजन का मजा ले रहे होते ?

क्या कोई घर पे आये तो उसके पास पंहुचने के लिए 4 दरवाजे  का इंटरलॉक खोलकर जा पाते ?

या मेरा मन करे तो दरवाजा खोलें या बिना दरवाजा खोले ही उनसे बात करें ऐसा कर पाते ?

इतनी आरामदायक और सुरक्षित जिंदगी के सूत्रधार और कोई नहीं हमारे महापुरुष ही हैं।

क्या वे लोग ऐसी जिंदगी जी पाये ?

क्या वे इसके हकदार नहीं थे ?

फिर भी उन्होंने अपनी जिंदगी आराम करने में क्यों नहीं बिताई।

क्योंकि अगर वे सुख चैन की जिंदगी बिताये होते तो हमें सुख चैन और आनंद नहीं मिलता।

यही सही है।

इसलिए अगर हम अपनी आरामदायक जिंदगी जो कि हमारे महापुरुषों के बदौलत है को 30 मिनट के लिए त्याग करें और उनके विचारों से अपने समुदाय को जगाने में खर्च करें तो हमारी आने वाली पीढ़ी का जीवन भी आरामदायक हो जायेगा।

मैं हमेशा एक बात सोचता हूँ

कि मैं अपने परदादा का नाम तक नहीं जानता पर ज्योतिबा फुले को जानता हूँ।

ऐसा मैं सोचता हूँ।

विश्व में हर रिकार्ड बाबा साहेब के नाम 1. भारत के सबसे पढे व्यक्ति

विश्व में हर रिकार्ड बाबा साहेब के नाम
1. भारत के सबसे पढे व्यक्ति

2. सबसे ज्यादा किताब लिखने वाले

3. सबसे तेज स्पीड से ज्यादा टाईप करने वाले

4. सबसे ज्यादा श्ाब्द टाईप करने वाले

5. सबसे ज्यादा आंदोलन करें

6. महिला अधिकार के लिए संसद में इस्तीफा देने
वाले

7. दलित, पिछडो के हको को दिलाने वाले

8. हिन्दू धर्म के ग्रन्थ मनुस्मर्ति को चोराहे पर जलाने
वाले

9. जातिवाद को समाप्त करने के लिए पंडतानि से
sadi करने वाले

10. गरीब मज़लूमो के हको के लिए 4 बच्चे कुर्बान करने
वाले

11. 2 लाख किताबो को पढ़कर याद रखने वाले

12. भारत का सविधान लिखा

13. पूना पैक्ट लिखा

14. मूक नायक पत्रिका निकाली

15. बहिस्किरत समाचार पत्र निकाला

16. सबसे तेज लिखने वाले

17. दोनों हाथो से लिखने वाले

18. mr ग़ांधी को जीवन दान देने वाले

19. सबसे काबिल बैरिस्टर

20. मुम्बई के सेठ के बेटे को फर्जी मुक़दमे से बरी कराने
वाले

21. योग करने वाले

22. सबसे ईमानदार

23. 18 से 20 घंटे पढ़ने वाले

24. सरदार पटेल को obc का मतलब समझाने वाले

25. स्कूल के बहार बैठकर और अपमान सहकर उच्च
शिक्षा पाने वाले

25. हम सबकी भलाई के लिए पत्नी रमाबाई को
खोने वाले ............

DR.B.R.AMBEDKAR

Tuesday, 5 April 2016

મેં જે કાર્ય કર્યુ છે, તે જીવનભર સખત પરિશ્રમ કરીને અનેક મુસીબતો સહન કરીને અને વિરોધીઓની સામે ઝઝુમીને જ કરી શક્યો છું.

મેં જે કાર્ય કર્યુ છે,
તે જીવનભર સખત પરિશ્રમ કરીને અનેક મુસીબતો સહન કરીને અને વિરોધીઓની સામે ઝઝુમીને જ કરી શક્યો છું.

અમેરીકા અને ઈંગ્લેન્ડ માં બ્રેડનાં બે ટુકડા અને તે પણ ન મળે તો માત્ર પાણી પી,
અર્ધભુખ્યો રહીને અભ્યાસ કર્યો છે.

ધરમાં પૈસા ન હોય ત્યારે ત્રણ-ચાર રુપિયા જેવી નજીવી રકમ માટે હાથ લંબાવવો પડતો.

દારુણ ગરીબીને કારણે મારી સમ્યકદર્શિની પત્ની રમા અર્ધભુખી રહેતી.

આમ મેં મારું સમગ્ર જીવન મારા ગરીબ શોષિત-પીડિત બાંધવોને સમર્પિત કરી તેમને બંધારણીય અધિકારો અપાવ્યા છે.

મારા અનુયાયિઓએ મારા આ "ક્રાંતિરથ" ને આગળ ધપાવવો જોઈએ,
જો તેઓ અસમર્થ હોય,
તો તેને ત્યાં જ છોડી દેવો જ્યાં તે છે.

પરંતુ આ "ક્રાંતિરથ" ને કોઈપણ પરિસ્થિત માં પાછળ હટવા ન દેવો.

મારા વ્હાલા બાંધવો ને મારો આ જ સંદેશ છે.

- ડૉ.આંબેડકર

Monday, 4 April 2016

BABA SAHEB

"अन्याय" से लड़ते हुए
आपकी "मौत" हो जाती है तो,
आने वाली पीढियां उसका "बदला" अवश्य लेगी.
परंतु यदि "सहते-सहते मर जाओगे तो,
आगे की पीढियां भी "गुलाम" बनी रहेंगी..!!

                        डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर

" जय भीम " मत भूलिये बाबा साहब को उस इंसान को न भूलिये, जिसने संविधान बनाया था !

" जय भीम "
मत भूलिये बाबा साहब को उस इंसान को न भूलिये, जिसने संविधान बनाया था !

जानवरों से बदतर थे हम, उसने हमे इन्सान बनाया था !!

न पढने का हक था, न लिखने का हक था हमें !

न जीने की आजादी थी, न मरने का हवा था हमें !!

खुद चप्पलो पर बैठकर पढे और हमें विद्वान बनाया था !

उस इन्सान को न भूलिये, जिसने संविधान बनायाथा !!

वो भी जी सकते थे, एक आम इंसान की तरह!

जैसे आजकल हम जीते है, एक दूसरे से अंजान की तरह !!

लेकिन उसने दबाकर अपने अरमानो की,

दिल में हमारे लिए कुछ करने का अरमान जगाया था !

उस इंसान को न भूलिये, जिसने संविधान बनाया था !!

किया था सामना सारे जमाने का, सोचिए कितनी हिम्मत थी उसमें !

सबसे आगे निकल गया निहत्था, सोचिए कितनी ताकत थी उसमें !!

अपने उद्देश्य के लिए द्रढ इच्छा व द्रढ सन्कल्प और कलम को उसने हथियारबनाया था !

उस इंसान को न भूलिए, जिसने संविधान बनाया था !!

BABA SAHEB

बुद्ध धम्म की विजय।सम्राट अशोक महान की विजय।बोधिसत्व, भारत रत्न बाबासाहेब की विजय।

ये भारतीय संविधान की विजय है।आज जरूरत है बाबासाहब के कारवां को आगे बढ़ाने की और इतिहास के सही जानकारी की जिससे हमारे लोग अनभिज्ञ है ।

बाबासाहब ने सारी व्यवस्था संविधान के माध्यम से हमारे लिए कर रखी है । जरूरत है बस उसे अमलीजामा पहनाने की ।हमारे लोगो ने बाबासाहब के उस कोटेशन को कभी गम्भीरता से क्यों नहीं लिया ।

ये बात मुझे आज तक समझ नहीं आई की शोषितो जाओ और
अपने घरो की दीवारो पर लिख दो कि""
तुम्हे इस देश का हुक्मरान बनना हैंंं

"दिल से जयभीम ।

Sunday, 3 April 2016

डो. बाबासाहेब अम्बेडकर जब पहलीगोलमेज सम्मेलन मे हिस्सा लेने गये थे

डो. बाबासाहेब अम्बेडकर जब पहलीगोलमेज सम्मेलन मे हिस्सा लेने गये थे

तब उनके साथ सयाजीराव गायकवाडऔर उनकी पत्नी भी साथ मे गये थे।जब गोलमेज सम्मेलन मे बाबासाहेब ने बढ़िया अंग्रेजी मे बोलनाशुरू किया तो सब अंग्रेज और बाकी केलोग जो गोलमेज सम्मेलन का हिस्साथे वो सब चौक्कने रह गये।

और बाबासाहेब को ऐसी बढ़ियाअंग्रेजी मे बोलते हुये सुनकर सयाजीराव गायकवाड़ ने अपनी पत्नीको कहा कि मैंने जो डो. अम्बेडकर कोस्कॉलरशिप दी थी वो डा. अम्बेडकर नेवसूल कर दी।

मुजे गर्व है कि मैंने ऐसे विध्यार्थीको स्कॉलरशिप दी जो ऐक दिन विश्वका महापुरुष बनेगा।साथियों बाबासाहेब को जोस्कॉलरशिप सयाजीराव गायकवाड ने दीथी वो बाबासाहेब ने वसूल कर दी थी।पर हमें जो स्कॉलरशिपबाबासाहेब ने दिलायी है उसे हम नेवसूल कि है??

क्या आज हम लोग डा.बाबासाहेब अम्बेडकर के चित्र केसामने खड़े होकर के बाबासाहेब केचित्र के आंखो मे आंखे डालकर ये कहसकते है कि बाबासाहेब आपने जो हमेंस्कॉलरशिप दिलवाई है वो हमनेसामाजिक काम और सामाजिक क्रांतिकरके वसूल कर दी है।

अगर नहीं कह सकते तो अभी भीवक़्त है अपना सामाजीक दायित्वसमझों और उसे निभावो।

जय भीम।

Saturday, 2 April 2016

ચાલો આંબેડકર જયંતિ ઉજવીએ.

ચાલો આંબેડકર જયંતિ ઉજવીએ.

નવા કપડાં ખરીદીએ ....
ઘરો ને સુશોભીત કરીએ
ચાલો આંબેડકર જયંતિ ઉજવીએ..

ગામ અને ફળિયા ને તોરણ થી શણગારિએ. ...
ઘરે ઘરે મિઠાઇ વહેચીએ.
ચાલો આંબેડકર જયંતિ ઉજવીએ ..

જુલુસ,રેલી અને મેળાવડો યોજીએ...
એક સાથે ભોજન કરીએ
ચાલો આંબેડકર જયંતિ ઉજવિએ.

નોકરી એથી વતન ના ઘરે જ ઇએ...
વતનબંધુઓ સાથે ફટાકડા ફોડી ઉજવણી કરીએ
ચાલો આંબેડકર જયંતિ ઉજવીએ.

ચાલો કઈં ક નવી વસ્તુ ઘર મા વસાવીએ...
નવી નકોર ગાડી કે મિલ્કત ખરીદીએ.
ચાલો આંબેડકર જયંતિ ઉજવિએ.

ચાલ આ દિવસે કં ઇક સંકલ્પ લઇએ ...
અને વેરભાવ ભુલી બધા એક થઇએ .
ચાલો આંબેડકર જયંતિ ઉજવિએ ..

Thursday, 24 March 2016

वसीम अकरम त्यागी भारत में डेढ करोड़ वैश्याऐं हैं यह संख्या कई देशों की की कुल जनसंख्या से भी अधिक है।

वसीम अकरम त्यागी भारत में डेढ करोड़ वैश्याऐं हैं यह संख्या कई देशों की की कुल जनसंख्या से भी अधिक है।

इस देश में गंगा (नदी) माता है, गाय (जानवर) माता है, धरती माता है। मगर औरत (इंसान) वैश्या है और वैश्या भी एक या दोहजार नहीं बल्कि डेढ करोड़ हैं।

14 फरवरी को देश पार्कों में जाकर डंडे लाठी से देश के प्रेमी युगल को ‘संस्कृती’ सिखाने वालोंको एक बार कोठे पर भी जाना चाहिये। ताकि अपने हाथो से तैयार की गई वैश्या संस्कृति का बदसूरत चेहरा देख सकें।

भारत माता है अथवा पिता है इस बहस के बीच यह सवालजोर से उठ जाना चाहिये कि भारत माता हो या पिता मगर उसकी डेढ करोड़ संतानवैश्या क्यों है ?

संविधान क्या कहता है ? गांधी जी क्या कहते थे ? बुद्ध क्या कहते थे ? अल्लाह के 99 नाम हैं ? प्लास्टिक सर्जरी भारत में हजारों साल से रही है गणेश जी की नाक प्लास्टिक सर्जरी से लगवाई गई थी।

मेरी मत राष्ट्रपति की सुनो ? इनसब बातों को सुनकर भक्त भले ही हर हर मोदी करके छाती पीटते हों मगर इस देश का एक बहुत बड़ा तबका है जो इतने भर से संतुष्ट नहीं है।

वह तबका जानना चाहता है कि जिन साहित्यकारों ने आवार्ड लौटाये हैं उनके बारे में मोदी क्या कहतेहै ? वह तबका सुनना चाहता है कि अखलाक के हत्यारों के बारे में मोदी क्या कहते है ? वह तबका सुनना चाहता है कि थोक में बांटे जा रहे देशभक्ती की सर्टिफिकेटके बारे में मोदी क्या कहते है ?

भारत माता की जय के नाम पर इंसानों की मां को दी जा रहीं गालियों के बारेमें मोदी क्या कहते है ? अपनी सरकार का सिर्फ एक ही मज्हब इंडिया फर्स्ट बताने वाले मोदी हिंदुत्व के नाम पर (गौ रक्षा) की जा रही हत्याओं के बारे में क्या कहते हैं ? सवालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है और ये सवाल उस तबके हैं जो किसी भी सरकार अथवा व्यक्ति विशेष का भक्त नहीं है बावजूद इसके उस तबके को मोदी भक्त हिंदु विरोधी या देशविरोधी कहकर संबोधितकरते हैं।

मोदी उपदेश देने के लिये प्रधानमंत्री नहीं बने हैं बल्कि परिवर्तन लाने के लिये प्रधानमंत्री बने हैं। मगर जैसा परिवर्तन उनके पाले हुऐ गुंडे इस देश में करना चाहते हैं वैसापरिवर्तन इस देश को हरगिज नहीं चाहिये।

फूट रही बहुसंख्यकवाद की सड़ांधभारतीय लोकतंत्र में बहुसंख्यकवाद की सड़ांध फूट रही है। यह बहुसंख्यकवाद मुंबई ब्लास्ट के मास्टर माइंड याकूब मेमन को फांसी देता है, मगर रथ यात्रा के मास्टर माइंड आडवाणी जिसने तमाम देश को दंगों की आग में झोंक दिया था उसे उप प्रधानमंत्री बनाता है।

संविधान पर भरौसा करके आत्मसमर्पण करने वाले मेमन को सजा ऐ मौत दी जाती है और उसी संविधान को जूते की नोक पर रखकर समतल जमीन का आह्वान करने वाले अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न सेनवाजा जाता है।

हम और हमारा राष्ट्र खौखलेपन से इतरा सकता हैकिहम विश्व कै सबसे बड़े लोकतंत्र हैं लेकिन इस बहुसंख्यकवादी लोकतंत्र की लाश कभी हैदराबाद सेंट्रल यूनीवर्सिटी के हाॅस्टलमें रोहित वेमुला की शक्ल में झूलती पाई जातीहै तो कभी झारखंड में मजलूम अंसारी और इब्राहीम की शक्ल में पेड़ पर झूलती पाई जाती है।

जिन लोगों ने रोहित को मारा था वे सत्ता में हैं और जिन लोगों ने अखलाक से लेकर इब्रहीम, मजलूम की लाशें बिछाई हैं उन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। मोदी ने दिल्ली में सूफिज्म पर लंबा भाषण दिया है मगर यजीदियत के खिलाफ एक लफ्ज भी न बोल पाये क्योकि भारतीय यजीद उनके ‘अपने’ लोग हैं।

नेशन वांट टू नो (देश जानना चाहता है) मगर तुम बताते नहीं कि उन दो मासूम मजदूरों जिनमें से एक बाल मजदूर था का क्या कसूर था जो उन्हें बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया गया ?

गाय तुम्हारी माता है यह तो समझ आता है मगर भैंस से क्या नाता है यह तो बताओ? भैंस से नाता इसलिये मालूम किया जा रहा है क्योंकि अखलाक को गाय मांस के आरोप में मारा था मगर ये मासूम तो पशु व्यापारी थे और गाय नहींबल्कि भैंस लेकर जा रहे थे फिर भी मार दिया गया। वे मीडिया माध्यम खुद कोमुख्यधारा का मीडिया बताते हैं

वेक्यों ‘झारखंड’ पर शान्त हैं ?क्या इसलिये कि मरने वाले मुसलमान थे और मारने वाले तथाकथित देशभक्त हैं ? या अल्पसंख्यकों की मौत महज ‘एंटरटेनमेंट’ है सियासी जमातों के लिये भी और मीडिया के लिये भी? अब प्राईम टाईम में क्यों नहीं कहते कि देश जानना चाहता है कि जानवरकी रक्षा के नाम पर इंसानों को जानवर समझना कहां तक जायज है ?

जानवरों की कथित रक्षा के नाम पर इंसानों को लाशों में तब्दील करने का अधिकार कौनसे संविधान ने दिया है ? मीडिया खामोश है ‘मन की बात’ करने वाला ‘चौकीदार भी खामोश है। क्या मीडिया इसीलिये खामोश है क्योंकि यह घटना ‘राम राज्य’ में हुई है ?

मीडिया की खामोशी यह बताने के लिये काफी है कि लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ पर राम राज्य वालों का कुत्ता मूत गयाहै।

(वसीम अकरम त्यागी – लेखक जाने माने पत्रकार और समाजसेवी है)

Sunday, 13 March 2016

dr.ambedakar