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Saturday, 2 April 2016

शराब का पहलाअनुभव तो दुखद ही है,

लेकिन शराब के गहरे अनुभव धीरे-धीरे सुखद होने शुरू हो जाते हैं, क्योंकि शराब आपको जगत से तोड़ देती है,जगत की चिन्ताओं से तोड़ देती है।जगत मिट जाता है, आप ही रह जाते हैं। यह बहुत ही मजे की बात है कि ध्यान और शराब में थोड़ा संबंध हैइसलिए विलियम जेम्स ने, जिसने कि इस सदी में धर्म और नशे के बीच संबंध खोजने में सर्वाधिक शोध कार्य किया,विलियम जेम्स ने कहा कि शराब का इतना आकर्षण गहरे में कहीं न कहीं धर्म से संबंधित है,अन्यथा इतना आकर्षण हो नहीं सकता।कहीं न कहीं शराब कुछ ऐसा करती होगी जो मनुष्य की गहरी धार्मिक आकांक्षा को तृप्त करता है—है संबंध। और इसलिए वेद के सोमरस से लेकर एलडूअस हक्सले तक, एल एसडी तक,धार्मिक आदमी का बड़ा हिस्सा नशों का उपयोग करता रहा है—बड़ा हिस्सा। और नशे के उपयोग में कहीं न कहीं कोई तालमेल है।वह तालमेल इतना ही है कि शराब आपको जगत सेतोड़ देती है इस बुरी तरह कि आप बिलकुल अकेले हो जाते हैं।अकेले होने में एक रस है। संसार की सारी चिन्ताएं भूल जाती हैं। आप एक गहरे अर्थ में निश्चिंत मालूम पड़ते हैं। हो तो नहींजाते।शराब तो थोड़ी देर बाद विदा हो जाएगी, चिन्ता वापस लौट आएगी,लेकिन शराब के साथ इस निश्चिंतता का रस जुड़ जाएगा। बस वह एक दफा रस जुड़ गया, फिर आप शराब के नाम से जहर पीते रहेंगे।वह कितना ही तिक्त मालूम पड़े, वह रस जो संयुक्त हो गया। हम विकृत रसों से भी जुड़ जा सकते हैं, और फिर उनकी पुनरुक्ति की मांग शुरू हो जाती है।महावीर वाणी, भाग-१, प्रवचन#१२, ओशो

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