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Monday, 21 March 2016

दुनिया मैं वैसा कहीं भी नहींहै।इसे देश ने कुछ दान दिया है मनुष्य की चेतना को,अपूर्व।यह देश अकेला है जब दो व्यक्ति नमस्कारकरते है,तो दो काम करते है।एक तो दोनों

दुनिया मैं वैसा कहीं भी नहींहै।इसे देश ने कुछ दान दिया है मनुष्य की चेतना को,अपूर्व।यह देश अकेला है जब दो व्यक्ति नमस्कारकरते है,तो दो काम करते है।एक तो दोनों हाथ जोड़ते है।दो हाथ जोड़ने का मतलब होता है: दो नहींएक।दो हाथ दुई के प्रतीक है, द्वैत केप्रतीक है।

उन दोनों को हाथ जोड़ने का मतलब होता है, दो नहींएक है।उस एक का ही स्मरण दिलाने के लिए।दोनों हाथों को जोड़ कर नमस्कार करते है।और, दोनों को जोड़ कर जो शब्द उपयोग करते है।वह परमात्मा का स्मरण होता है।

कहते है: राम-राम, जय राम, या कुछ भी,लेकिन वह परमात्मा का नाम होता है।दो को जोड़ा कि परमात्मा का नाम उठा।दुई गई कि परमात्मा आया।दो हाथ जुड़े और एक हुए कि फिर बचा क्या: हे राम।

–ओशो

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