जोरबा का अर्थ है सांसारिक रूप से समृद्ध और जिम्मेदार व्यक्ति, बुद्ध का अर्थ है जागा हुआ व्यक्ति ।
ओशो को बुद्ध में एक थोड़ी सी कमी नजर आई कि बुद्ध भीतर से संपन्न हैं आत्मवान हैं ज्ञानी हैं संत हैं आनंदित और जाग्रत हैं
लेकिन भूख लगने पर भीख मांगते हैं और बरसात में छप्पर की मांगकरते हैं।आध्यत्मिक पक्ष तो मजबूत है और सांसारिक पक्ष कमजोर है और यह त्याग कारास्ता सबके चलने लायक भी नही है।
अगर सब त्यागी हो गए तो फिर कमाएगा कौन।इसलिए ओशो ने अपने सन्यासियो को जोरबा दि बुद्धा का संदेस दिया।
सांसारिक रूप से अपने परिवार,मित्रों,समाज, विश्व के प्रति उत्तरदायित्व से भरा व्यक्ति और साथ ही बोध से भरा व्यक्ति,दोनों एक साथ, सन्यास भी और संसार भी, जोदोनों में कुशल है वह जोरबा दी बुद्धा है।
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